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सुपर कम्प्यूटर

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आधुनिक परिभाषा के अनुसार वे कम्प्यूटर जिनकी मेमोरी स्टोरेज (स्मृति भंडार) 52 मेगाबाइट से अधिक हो एवं जिनके कार्य करने की क्षमता 500 मेगा फ्लॉफ्स (Floating Point operations per second - Flops) हो, उन्हें सुपर कम्प्यूटर कहा जाता है। सुपर कम्प्यूटर में सामान्यतया समांतर प्रोसेसिंग (Parallel Processing) तकनीक का प्रयोग किया जाता है।

सुपर कम्प्यूटिंग शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1920 में न्यूयॉर्क वल्र्ड न्यूज़पेपर ने आई बी एम द्वारा निर्मित टेबुलेटर्स के लिए किया था। 1960 के दशक में प्रारंभिक सुपरकम्प्यूटरों को कंट्रोल डेटा कॉर्पोरेशन, सं. रा. अमेरिका के सेमूर क्रे ने डिजाइन किया था।

सुपरकम्प्यूटर की परिभाषा काफी अस्पष्टï है। वर्तमान के सुपर कम्प्यूटर आने वाले समय के साधारण कम्प्यूटर करार दिए जा सकते हैं। 1970 के दशक के दौरान अधिकाँश सुपर कम्प्यूटर वेक्टर प्रोसेसिंग पर आधारित थे। 1980 और 1990 के दशक से वेक्टर प्रोसेङ्क्षसग का स्थान समांतर प्रोसेसिंग तकनीक ने ले लिया। समांतर प्रोसेसिंग तकनीक में बहुत सारे माइक्रोप्रोसेसरों का प्रयोग एक-दूसरे से जोड़कर किया जाता है। ये माइक्रोप्रोसेसर किसी समस्या को उनकी माँगों (demands) में विभाजित करके उन माँगों पर एक साथ कार्य करते हैं। सुपर कम्प्यूटर में 32 या 64 समानांतर परिपथों में कार्य कर रहे माइक्रोप्रोसेसरों के  सहयोग से विभिन्न सूचनाओं पर एक साथ कार्य किया जाता है, जिससे सुपर कम्प्यूटर में 5 अरब गणनाओं की प्रति सेकेण्ड क्षमता सुनिश्चित हो जाती है। इस प्रकार बहुत सारी गणनाओं की आवश्यकताओं वाली जटिल समस्याओं के समाधान हेतु सुपर कम्प्यूटर का उपयोग किया जाता है।

प्रारंभिक सुपर कम्प्यूटर की गति मेगा फ्लॉफ्स (106 फ्लॉफ्स) में पाई जाती थी, परंतु अब यह गति साधारण सुपर कम्प्यूटर की गति बनकर रह गई है। वर्तमान में सुपर कम्प्यूटरों में गीगा फ्लॉफ्स (109 फ्लाफ्स) की गति पाई जाती है।

प्रयोग
सुपर कम्प्यूटरों का प्रयोग उच्च-गणना आधारित कार्यों में किया जाता है। उदाहरण- मौसम की भविष्यवाणी, जलवायु शोध (वैश्विक ऊष्णता से सम्बंधित शोध भी इसमें शामिल है), अणु मॉडलिंग (रासायनिक यौगिकों, जैविक वृहद् अणुओं, पॉलीमरों और क्रिस्टलों के गुणों और संरचनाओं की कम्प्यूटिंग) इत्यादि। सैन्य और वैज्ञानिक एजेंसियां इसका काफी उपयोग करती हैं।

सुपर कम्प्यूटर चुनौतियाँ और तकनीक
  • सुपर कम्प्यूटर भारी मात्रा में ऊष्मा पैदा करते हैं और उनका शीतलन आवश्यक है। अधिकाँश सुपर कम्प्यूटरों को ठंडा करना एक टेढ़ी खीर है।
  • किसी सुपर कम्प्यूटर के दो भागों के मध्य सूचना प्रकाश की गति से अधिक तेजी से नहीं पहुँच सकती है। इसकी वजह से सेमूर क्रे द्वारा निर्मित सुपर कम्प्यूटर में केबल को छोटे से छोटा रखने की कोशिश की गई, तभी उनके क्रे रेंज के सुपर कम्प्यूटरों का आकार बेलनाकार रखा गया।
  • सुपर कम्प्यूटर अत्यन्त अल्प काल के दौरान डाटा की विशाल मात्रा का उत्पादन व खपत कर सकते हैं। अभी 'एक्स्टर्नल स्टोरेज बैंडविड्थ' (external storage bandwidth) पर काफी कार्य किया जाना बाकी है। जिससे यह सूचना तीव्र गति से हस्तांतरित और स्टोर की/पाई जा सके।
सुपर कम्प्यूटरों के लिए जो तकनीक विकसित की गई हैं वे निम्न हैं-
  • वेक्टर प्रोसेसिंग
  • लिक्विड कूलिंग
  • नॉन यूनीफॅार्म मेमोरी एक्सेस (NUMA)
  • स्ट्राइप्ट डिस्क
  • पैरेलल फाइल सिस्टम्स
सामान्य प्रयोजन वाले सुपर कम्प्यूटरों के प्रयोग
इनके तीन प्रकार होते हैं-
  • वेक्टर प्रोसेसिंग सुपर कम्प्यूटरों में एक साथ काफी विशाल मात्रा के डाटा पर कार्य किया जा सकता है। 
  • काफी कसकर जुड़े हुए क्लस्टर सुपर कम्प्यूटर कई प्रोसेसरों के लिए विशेष रूप से विकसित इंटरकनेक्ट्स का उपयोग करते हैं और उनकी मेमोरी एक-दूसरे को सूचना देती है। सामान्य प्रयोग वाले तेज गति के सुपर कम्प्यूटर आज इस तकनीक का उपयोग करते हैं।
  • कॉमोडिटी क्लस्टर्स सुपर कम्प्यूटर काफी संख्या में कॉमोडिटी पर्सनल कम्प्यूटरों का प्रयोग करते हैं, जो उच्च बैंडविड्थ के लोकल एरिया नेटवर्कों से जुड़े रहते हैं।

विशेष प्रयोजन वाले सुपर कम्प्यूटर
विशेष प्रयोजन वाले सुपर कम्प्यूटर उच्च-कार्य क्षमता वाली कम्प्यूटिंग मशीनें होती हंै जिनका हार्डवेयर आर्किटेक्चर एक समस्या विशेष के लिए होता है। इनका प्रयोग खगोल-भौतिकी, गणनाओं और कोड ब्रेकिंग अनुप्रयोगों में किया जाता है।

भारत में सुपर कम्प्यूटर
भारत में प्रथम सुपर कम्प्यूटर क्रे-एक्स MP/16 1987 में अमेरिका से आयात किया गया था। इसे नई दिल्ली के मौसम केंद्र में स्थापित किया गया था। भारत में सुपर कम्प्यूटर का युग 1980 के दशक में उस समय शुरू हुआ जब सं. रा. अमेरिका ने भारत को दूसरा सुपर कम्प्यूटर क्रे-एक्स रूक्क देने से इंकार कर दिया। भारत में पूणे में 1988 में सी-डैक (C-DAC) की स्थापना की गई जो कि भारत में सुपर कम्प्यूटर की तकनीक के प्रतिरक्षा अनुसंधान तथा विकास के लिए कार्य करता है। नेशनल एयरोनॉटिक्स लि. (NAL) बंगलौर में भारत का प्रथम सुपर कम्प्यूटर 'फ्लोसॉल्वरÓ विकसित किया गया था। भारत का प्रथम स्वदेशी बहुउद्देश्यीय सुपर कम्प्यूटर 'परमÓ सी-डैक पूणे में 1990 में विकसित किया गया। भारत का अत्याधुनिक कम्प्यूटर 'परम 10000Ó है, जिसे सी-डैक ने विकसित किया है। इसकी गति 100 गीगा फ्लॉफ्स है। अर्थात् यह एक सेकेण्ड में 1 खरब गणनाएँ कर सकता है। इस सुपर कम्प्यूटर में ओपेन फ्रेम (Open frame) डिजाइन का तरीका अपनाया गया है। परम सुपर कम्प्यूटर का भारत में व्यापक उपयोग होता है और इसका निर्यात भी किया जाता है। सी-डैक में ही टेराफ्लॉफ्स क्षमता वाले सुपर कम्प्यूटर का विकास कार्य चल रहा है। यह परम-10000 से 10 गुना ज्यादा तेज होगा।
सी-डैक ने ही सुपर कम्प्यूटिंग को शिक्षा, अनुसंधान और व्यापार के  क्षेत्र में जनसुलभ बनाने के उद्देश्य से पर्सनल कम्प्यूटर पर आधारित भारत का पहला कम कीमत का सुपर कम्प्यूटर 'परम अनंतÓ का निर्माण किया है। परम अनंत में एक भारतीय भाषा का सर्च इंजन 'तलाशÓ, इंटरनेट पर एक मल्टीमीडिया पोर्टल और देवनागरी लिपि में एक सॉफ्टवेयर लगाया गया है। यह आसानी से अपग्रेड हो सकता है, जिससे इसकी तकनीक कभी पुरानी नहीं पड़ती है।
अप्रैल 2003 में भारत विश्व के उन पाँच देशों में शामिल हो गया जिनके पास एक टेरॉफ्लॉफ गणना की क्षमता वाले सुपरकम्प्यूटर हैं। परम पद्म नाम का यह कम्प्यूटर देश का सबसे शक्तिशाली कम्प्यूटर है।

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